Wednesday, April 13, 2016

Shayari on Dr. Babasaheb Ambedkar. Part 2. " 125th Birth Anniversary Celebrations."

( Continued from previous post dated, Friday, April 13, 2012, Shayari on Dr. Babasaheb Ambedkar Part 1 Please see that post for more shayari )


भारतरत्न महामानव बोधिसत्व डॉ. भिमराव आंबेडकर की १२५ वि वर्षगांठ के अवसर पर आप सभी को दिलसे बहोत बहोत शुभकामनाएं ।

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कभी कम ना होंगी तारीफें आपकी,
हमारी सारी पिढिया आपको नतमस्तक होंगी ।
"जय भिम" का यह नारा,
पुरी दुनिया में बुलंद करेगी ।

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हमला चाहे जैसा होगा,
हाथ हमारा नहीं उठेगा।
हम भिम - बुद्ध के अनुयायी हैं,
कलम हमारी पहचान है ।
हिंसा हमारा "धम्म" नहीं
हम भिम - बुद्ध के अनुयायी हैं ।

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मेरे भिम का लिखा पढ़ेगा,
तो खून खौल जाएगा।
सच्चा "देशभक्त" कोन,
ये सच तु समझ जाएगा।

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तेरे "अधिकार" की बात,
न तिलक ने की न गांधी ने की।
वो हम सब का बाप भिमराव आंबेडकर था,
जिसने  "समान - अधिकार" की बात की।

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स्वतंत्रता क्या होती है?
समानता क्या होती है?
स्वाभिमान क्या होता है?
जीना क्या होता है?
यह तो सिर्फ मेरे "भिमने" बताया ,
स्वतंत्रतासे समानता और स्वाभिमान से जीना  क्या होता है।

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दारू पिउन सडलास रे तु ,
प्रज्ञा - शील - करूणा
विसरलास रे तु .
लाज वाटुदे "जय भिम" म्हणतांना ,
जुगारात स्वाभिमान हरलास रे तु .


माझ्या "काही" समाज बांधवांनो  दारू-जुगार सोडा.
तो पैसा शिक्षणात-पुस्तकात खर्च करा.


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पंचशीलाचे पालन करू ,
अष्टांग मार्गाने पुढे चालू  .
तथागताच्या विचाराने,
सारा भारत  "बुद्धमय" करु.

जय भिम  जय बुद्ध  जय भारत



-----> उपरोक्त सभी मेरी सोच ओर मेरी खुदकी लिखावट हैं।


                                                                                                                                       आपका दोस्त ,
                                                                                                                                    कुणाल अर्जुन मोरे 



जय भिम  जय बुद्ध  जय भारत


कोई चीखकर चला गया,
कोई चील्लाकर चला गया,
तो कोई स्कूलमे सबक सीखकर चला गया |
अरे "रामजी का बेटा"स्कूल के बाहर रहा
और
पूरे भारत की तकदीर लीखकर चला गया ।
 जय भीम

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कोणी म्हणतोय ठाण्याचा राजा
कोणी म्हणतोय  पुण्याचा राजा
तर कोणी म्हणतोय लालबाग चा राजा
अरे आम्ही म्हणतो
ज्याचा
साऱ्या
जगात
गाजावाजा
"भीमराव एकच राजा"


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दणका दिला कोर्टान,
दार उघडलं देवान ,
एक ही पुरूष नव्हता महिलांच्या बाजुनं,​​​​
कोर्टात उत्तर दिल सरकारनं

कारण,
घटनेत समान अधिकार दिलाय
"माझ्या   भिमानं"
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"डोळ्यातुन निघणार्या अश्रुनां आज मुभा आहे,कारण प्रत्येक गरिबाच्या मागे माझा भीम खंबीरपणे उभा आहे…
 जय भिम

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मला डोक्या वरती ना ताज पाहिजे,
ना दुनिया वरती राज पाहिजे,
मला फ़क्त येत्या  14 एप्रिल ला माझा सारा समाज एक पाहिजे.
         🙏 जय भीम 🙏

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गिरे हुवे को जिन्होंने स्वाभिमान सिखाया था,
जिन्होंने हम सब को तुफान से टकराना, सिखाया था,
देश का था वो अनमोल रत्न जो बाबासाहेब  केहलाया था।


जय भिम

1 comment:

  1. kai k vo din kai sanghars sanghrs ki bate vaha kya khub likhi he bhim ne adhikar ki bate ki bate

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